आमदई खदान में मजदूरी विवाद से छह दिन से खनन-परिवहन ठप, ट्रक मालिकों की किस्त संकट में


जिला नारायणपुर
जिले के आमदई लौह अयस्क खदान में पिछले छह दिनों से खनन एवं परिवहन कार्य पूरी तरह से ठप पड़ा है। स्थानीय मजदूरों द्वारा प्रतिदिन 100 रुपये दिहाड़ी बढ़ाने की मांग को लेकर किए जा रहे आंदोलन के चलते माइंस की सभी गतिविधियां बंद हैं। मजदूर संघ अपनी मांगों को जायज बता रहा है, वहीं निको प्रबंधन इसे नियमों के विरुद्ध और अव्यवहारिक करार दे रहा है।
हड़ताल का सीधा असर ट्रक मालिकों, चालकों और उनसे जुड़े हजारों परिवारों पर पड़ रहा है। बरसात और खराब सड़कों की मार झेलने के बाद जैसे-तैसे पटरी पर लौटे ट्रकों को अब बेमौसमी हड़ताल ने फिर आर्थिक संकट में डाल दिया है। परिवहन ठप होने से किस्त भरना ट्रक मालिकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
बरसात के मौसम में सीमित ट्रिप और लगातार टूट-फूट के कारण पहले से कर्ज में डूबे ट्रक मालिकों के लिए इस माह किस्त चुकाना आसान नहीं दिख रहा। जिले के अधिकांश ट्रक मालिकों का सिबिल स्कोर इतना कमजोर हो चुका है कि उन्हें उपभोक्ता ऋण तक मिलना मुश्किल हो गया है।
मजदूर आंदोलन को लेकर जिले में यह सवाल भी उठने लगे हैं कि यदि मजदूर केवल दिहाड़ी बढ़ोतरी तक ही सीमित मांग रखते हैं, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पर्यावरण जैसे मुद्दों को आंदोलन का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया। इससे आमजन का व्यापक समर्थन भी उन्हें मिल सकता था।
आंकड़ों पर नजर डालें तो मनरेगा में अकुशल मजदूरों को 261 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है, जबकि आमदई खदान में कार्यरत 425 अकुशल मजदूरों को 541 रुपये प्रतिदिन भुगतान किया जा रहा है। इसके बावजूद मजदूरों द्वारा दिहाड़ी कम बताई जा रही है, जिसे लेकर मतभेद और गहरे हो गए हैं।
मजदूर संघ के अध्यक्ष अंतु कोर्राम का कहना है कि कई मजदूर पिछले 3–4 वर्षों से इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल, डिस्पैच और माइनिंग जैसे तकनीकी कार्य कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें अकुशल श्रेणी में रखना अन्यायपूर्ण है। संघ की मांग है कि मजदूरों का सही वर्गीकरण कर उन्हें अर्धकुशल श्रेणी में शामिल किया जाए।
वहीं मालक परिवहन संघ के अध्यक्ष किशोर आर्य ने बताया कि लोडिंग बंद होने से ट्रक मालिकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। हड़ताल समाप्त होने के बाद भी बाहरी राज्यों से लौटने वाले ड्राइवरों के कारण परिवहन सामान्य होने में कई दिन लग सकते हैं।
निको प्रबंधन के मानव संसाधन प्रमुख दशरथी बुधिया ने बताया कि केंद्र सरकार की न्यूनतम वेतन अधिसूचना के अनुसार हर छह माह में वेतन बढ़ाया जा रहा है। पीएफ, बीमा और सुरक्षा मानकों सहित सभी श्रम कानूनों का पालन किया जा रहा है। इसके बावजूद कंपनी ने सद्भावना दिखाते हुए न्यूनतम वेतन से अतिरिक्त 18 रुपये प्रतिदिन देने का प्रस्ताव रखा है। प्रबंधन ने श्रमिकों से जनहित में कार्य पर लौटने की अपील की है।
छह दिनों से जारी इस आंदोलन पर प्रशासन की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना होगा कि बातचीत से समाधान निकलता है या फिर किसी कठोर कदम की ओर बढ़ता है।




