दुर्ग रेलवे स्टेशन कांड: आदिवासी युवतियों ने महिला आयोग में लगाई गुहार, सभी पक्षों को अगली सुनवाई में तलब


जिला नारायणपुर, – छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित दुर्ग रेलवे स्टेशन कांड ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। अबूझमाड़ क्षेत्र की तीन आदिवासी युवतियां अपने परिजनों के साथ आज राज्य महिला आयोग की अदालत पहुंचीं और न्याय की गुहार लगाई।
युवतियों का आरोप है कि हाल ही में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दुर्ग रेलवे स्टेशन पर उन्हें जबरन रोका और उनके साथ जा रही दो ननों को पुलिस के हवाले कर दिया। कार्यकर्ताओं ने मानव तस्करी और धर्मांतरण का संदेह जताया था। हालांकि, पुलिस जांच में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया और अदालत ने दोनों ननों को ज़मानत भी दे दी।
महिला आयोग में पेश होकर युवतियों ने कहा कि वे अपनी स्वेच्छा से रोज़गार की तलाश में अन्य राज्य जा रही थीं। नन सिर्फ उन्हें काम दिलाने में सहयोग कर रही थीं, लेकिन स्टेशन पर उन्हें घेरकर अपमानित किया गया। युवतियों का कहना है कि इस घटना से उन्हें मानसिक आघात और सामाजिक प्रतिष्ठा पर गहरी चोट पहुँची है।
आज हुई सुनवाई में आयोग ने सभी पक्षों को तलब किया था। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी बुलाया गया था। सुबह करीब 11 बजे ज्योति शर्मा आयोग में तो पहुँचीं लेकिन औपचारिक सुनवाई से पहले ही लौट गईं और अनुपस्थित रहीं। इस पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि अगली सुनवाई में ज्योति शर्मा सहित सभी पक्षकारों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
आयोग ने स्पष्ट किया कि इतना संवेदनशील मामला है जिसमें कोई भी पक्ष बच नहीं सकता। अगली सुनवाई में सभी से तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने इसे आदिवासी समुदाय की गरिमा और स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि रोजगार की तलाश में बाहर जाना किसी भी युवती का अधिकार है और धार्मिक संगठनों द्वारा इस तरह का हस्तक्षेप उनकी स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा करता है।




