नारायणपुर

परिवहन संघ में फूट: सदस्यता और ट्रक परमिशन को लेकर अध्यक्ष-सचिव आमने-सामने

परिवहन संघ में फूट: सदस्यता और ट्रक परमिशन को लेकर अध्यक्ष-सचिव आमने-सामने

जिला नारायणपुर, मुख्यालय नारायणपुर जिले के मालक परिवहन संघ में इन दिनों आंतरिक कलह चरम पर है। नये सदस्यों को सदस्यता देने और हिसाब-किताब की पारदर्शिता को लेकर अध्यक्ष किशोर आर्य और सचिव रुपेश देवांगन आमने-सामने आ गए हैं। मामला अब इतना बिगड़ चुका है कि परिवहन संघ दो गुटों में बंट चुका है, और बात सचिव व एक सदस्य के निष्कासन तक पहुँच गई है।

हिसाब-किताब को लेकर शुरू से ही विवाद

संघ में लंबे समय से हिसाब-किताब को लेकर मतभेद देखने को मिलते रहे हैं। 26 जुलाई को आयोजित एक बैठक में सचिव रुपेश देवांगन ने अपने 9 महीने के कार्यकाल का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया, जिस पर उपस्थित सदस्यों ने संतोष जताया। लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद, 30 जुलाई को एक आपात बैठक में सचिव रूपेश देवांगन और सदस्य अर्जुन देवांगन को बिना कारण बताओ नोटिस जारी किये ही संघ से निष्कासित कर दिया गया। इसके साथ ही दोनों की ट्रकों की लोडिंग पर भी रोक लगा दी गई। यह कार्रवाई उनकी अनुपस्थिति में की गई, जिससे विवाद और गहरा गया।

नये सदस्यता को लेकर टकराव

5 जुलाई को संघ द्वारा नये सदस्यों के लिए आवेदन मंगवाए गए थे। प्रचार-प्रसार कर जिलेभर से 200 से अधिक आवेदन आये, जिनमें से 100 लोगों को प्राथमिकता देते हुए सदस्यता प्रदान की गई। लेकिन अचानक 30 जुलाई को अध्यक्ष किशोर आर्य द्वारा सभी नये सदस्यताओं को आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया गया, जिससे असंतोष फैल गया।

नए ट्रक परमिशन को लेकर पुरानों का दबदबा

अमदई खदान में 16 चक्का ट्रकों की संख्या बढ़ाने के मुद्दे पर भी टकराव सामने आया है। सचिव देवांगन का कहना है कि जिले के निवासी और ग्रामीणों को इस प्रक्रिया में वरीयता मिलनी चाहिए, जबकि अध्यक्ष व उनके समर्थक पुराने सदस्यों के ट्रकों की संख्या बढ़ाने के पक्षधर हैं। सत्ता पक्ष के प्रभावशाली लोगों द्वारा 5-5 ट्रकों का आवेदन दिया गया है, जबकि नये सदस्यों को नजरअंदाज कर दिया गया है।

दोनों गुट पहुँचे जिलाधीश के पास

विवाद की गंभीरता को देखते हुए दोनों गुट अब न्याय की गुहार लेकर जिलाधीश के पास पहुँच गए हैं। जहां अध्यक्ष गुट ने सिर्फ सचिव के लेनदेन की जांच की मांग की है, वहीं सचिव रुपेश देवांगन ने पूरे संघ के गठन से लेकर अब तक के सभी लेनदेन की निष्पक्ष जांच की मांग रखी है।

मालक परिवहन संघ अध्यक्ष बोले- दिशा निर्देश की अवहेलना हुई

जब अध्यक्ष किशोर आर्य से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, “संघ के दिशा-निर्देशों की बार-बार अनदेखी करने के कारण सचिव और एक सदस्य को निलंबित किया गया है।”

सचिव का पलटवार – जिलेवासियों के हक की लड़ाई है यह

दूसरी ओर सचिव रुपेश देवांगन ने कहा, “यह सिर्फ संघ का विवाद नहीं है, बल्कि जिले के मूल निवासियों के हक की लड़ाई है। हम तब तक संघर्ष करते रहेंगे जब तक हर ग्रामीण और आदिवासी को ट्रक मालिक बनने का समान अवसर नहीं मिल जाता।”

परिवहन संघ का यह विवाद सिर्फ आंतरिक सत्ता संघर्ष नहीं, बल्कि जिले के ग्रामीण, आदिवासी और नए प्रतिभागियों को अवसर देने की लड़ाई में बदल चुका है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी निष्पक्षता से कार्यवाही करता है।

Maad Sandesh
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