नारायणपुरमनोरंजन

अबूझमाड़ का खुलता रहस्य: कई जलप्रपात, कई कहानियाँ

जिला नारायणपुर माड़संदेश की खास खबर

“जहाँ कभी नक्सलियों का डर था, वहाँ अब प्रकृति का जादू बिखरा है”

अबूझमाड़ का गहना: कच्चापाल जलप्रपात बना सैलानियों का आकर्षण, पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं”

खबर: नारायणपुर ज़िले में स्थित अबूझमाड़ का कच्चापाल जलप्रपात इन दिनों सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर यह जलप्रपात ग्राम कच्चापाल में स्थित है, जहाँ तक ग्राम बासिंग, कुंदला, कोहकमेटा, इरकभट्टी होते हुए सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है। इसके बाद लगभग 2 किलोमीटर की पैदल पगडंडी तय कर प्रकृति की इस अद्भुत देन तक पहुँचा जा सकता है। बारिश के मौसम में 65 से 70 फीट की ऊँचाई से गिरता जलप्रपात का दृश्य अत्यंत मनोहारी प्रतीत होता है।

अबूझमाड़ का यह क्षेत्र एक समय नक्सल प्रभाव के चलते सुलभ नहीं था, लेकिन आज पुलिस कैंपों की स्थापना, सड़क निर्माण, मोबाइल नेटवर्क, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं एवं यातायात सुविधा के विस्तार के साथ यह क्षेत्र विकास की ओर तेजी से अग्रसर है। कच्चापाल, कोडियार, कुतुल, बेड़मकोटी, पदमकोट और नेलांगुर जैसे गाँवों में सरकार एवं जिला प्रशासन की योजनाओं के चलते आज मूलभूत सुविधाएँ सुलभ हो रही हैं, हालांकि कुछ स्थानों पर कार्य अभी भी प्रगति पर है।

कच्चापाल जलप्रपात के साथ-साथ अबूझमाड़ में कई अन्य रहस्यमयी और रमणीय जलप्रपात भी मौजूद हैं – जैसे हंदावाड़ा, हरिमरका, फरसबेड़ा, कुरुषनार और ओरछा जलप्रपात – जो प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं जो कि पहले नक्सलियों के गढ़ माने जाते थे। इनमें से कई स्थल आज भी बाहरी दुनिया से पूरी तरह जुड़ नहीं पाए हैं, लेकिन भविष्य में यह पूरे क्षेत्र को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र में बदल सकते हैं।

सावधानी और सुझाव: 

माड़ सन्देश की टीम ने जलप्रपात स्थल का निरीक्षण करते हुए पर्यटकों को कुछ आवश्यक सावधानियों का पालन करने की सलाह दी है:

यह क्षेत्र पूर्ण रूप से जंगली और पहाड़ी है, इसलिए कीटों से बचाव के लिए ओडोमॉस, कीटो रिपेलेंट, ग्लूकोज़ ड्रिंक और खाद्य सामग्री अवश्य साथ रखें।

छोटे बच्चों को यहाँ लाना फिलहाल सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि वैकल्पिक मार्ग नहीं हैं और चढ़ाई-उतराई कठिन है।

पथरीली चट्टानों पर स्टंट करते हुए स्नान न करें, अत्यधिक फिसलन होने की संभावना रहती है।

जंगली पत्तियों या फल-फूलों का स्वाद लेने का जोखिम न उठाएं।

दोपहिया/चारपहिया वाहन की स्थिति सुनिश्चित करें और पर्याप्त हवा टायर में रखें।

अपने कचरे को अपने साथ वापस लाएं और प्रकृति की स्वच्छता बनाए रखें।

सामाजिक मीडिया पर लोकप्रियता: 

इन दिनों युवा वर्ग, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, मीडिया प्रतिनिधि और नेचर प्रेमी यहाँ पहुंचकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं और रील्स, फ़ोटो व वीडियोज़ बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई द्वारा हाल ही में जलप्रपात का भ्रमण भी किया गया, जिससे स्थानीय प्रशासन की सक्रियता स्पष्ट होती है।

स्थानीय युवाओं की पहल और पर्यटन की संभावना: लगभग चार-पाँच वर्ष पहले कुछ साहसी युवाओं ने पहली बार इस जलप्रपात की खोज कर सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी साझा की थी। तब से लेकर अब तक इस क्षेत्र में सड़क निर्माण और पुलिस कैम्पों की स्थापना ने इसे सुलभ बनाया है। डेढ़ वर्ष पहले तक यह स्थल पूरी तरह अनजान था, लेकिन आज यह क्षेत्र पर्यटन मानचित्र पर उभरता नया नाम बन चुका है।

जरूरत है सरकारी पहल की:

अब समय आ गया है कि जिला प्रशासन इस प्राकृतिक धरोहर को विधिवत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे। यहाँ बुनियादी पर्यटक सुविधाएं जैसे शौचालय, विश्राम स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, स्थानीय गाइड और खान-पान केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं। इससे न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि छत्तीसगढ़ पर्यटन को भी एक नई पहचान मिलेगी।

Maad Sandesh
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