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विश्वप्रसिद्ध एतिहासिक मावली मेला का शुभारंभ आज से क्यों प्रसिद्ध है नारायणपुर मावली मेला

जिला नारायणपुर

मावली मेला मड़ई आदिवासी समाज के आस्था का पर्व माना जाता है। नारायणपुर में मावली मेला शिवरात्रि के पहले बुधवार को आयोजित की जाती है। कई वर्ष पूर्व ऐतिहासिक मावली मेले में केवल पारंपरिक रस्मों और संस्कृति ही बची रह गई है. मेले में जो भीड़ और माहौल आज से 3 दशक पूर्व दिखाई पड़ता था,कोरोना काल के बाद इस वर्ष मेले की रौनक बढ़ती दिख रही है।

मेले के शुभारंभ के दौरान पारंपरिक रस्मों एवं विधि विधान के साथ देवी-देवता और आंगादेव के साथ-साथ क्षेत्र के सभी पुजारी भी बड़ी संख्या में माता मावली के परघाव पारंपरिक रस्म में शामिल होते हैं,और माता मावली का आशीर्वाद लिया जाता है,परघाव की रस्म में माता मावली के मंदिर से जुलूस निकालकर बुधवारी बाजार में देवी-देवताओं के मिलन के बाद आड़मावली माता मंदिर के ढाई परिक्रमा की रस्म पूरी की जाती है। जुलूस के दौरान देवी देवताओ और आंगा देवो का जगह जगह पर मिलन और नाचने गाने का सिलसिला चलता रहता है।

बस्तर संभाग की दक्षिण पश्चिम भाग में जिला नारायणपुर स्थित है, संपूर्ण क्षेत्र नैसर्गिक वन संपदा से परिपूर्ण आदिवासियों की अलौकिक संस्कृति आज भी यहां अपने आप में स्वभाविक रुप में विद्यमान है। यहां के आदिवासी परंपरा क्षेत्र के निवासियों एवं जिले वासियों के साथ क्षेत्र की पहचान है।

बस्तर की अंतरराष्ट्रीय पहचान यहां की संस्कृति है, यहां का घोटूल है नारायणपुर में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध मावली मंडई में यहां लोग यहां की संस्कृति और आदिवासियों के जीवन को झांकने आते है। यही कारण है कि मावली मेला नारायणपुर की अंतरराष्ट्रीय ख्याति है। नारायणपुर का मावली मेला बस्तर के आदिवासियों का सबसे बड़ा मेला है। यहां बस्तर संभाग के सभी क्षेत्रों की आदिवासी समाज जुटता है, आदिवासियों के विभिन्ना प्रजाति की संस्कृति का यह मेला समागम स्थल है,कोरोना काल से पूर्व विदेशी शैलानी इस मेले में आदिवासी संस्कृति एवं जीवन शैली प्राकृतिक खूबसूरती को करीब से देखने व जानने आते हैं।

नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ विकासखंड में विशेष संरक्षित माड़िया जनजाति निवास करती है। वहीं नारायणपुर में बहुसंख्यक मूरिया जनजाति निवास करती है, नारायणपुर जिला में हल्बा जनजाती और अन्य कोष्टा, धाकड़ मरार, कलार, कुम्हार, राउत, केवट नाई, धोबी, घडवा अंधकोरी (गाडा) जातियां निवास करती है। मेला आदिवासी समाज की आस्था का पर्व है। नारायणपुर में मावली मेला शिवरात्रि के पहले बुधवार को आयोजित की जाती है।

मुख्य मेला बुधवार को ही मानी जाती है,और रविवार समाप्ति की जाती है,क्योंकि इसी दिन देवी परिक्रमा होती है और मेले की विधिवत शुरुआत होती है, मावली मेला के लिए तिथि का निर्धारण देव समिति द्वारा पूर्व में किया जाता है,और जिला प्रशासन को अवगत करा दिया जाता है, मेले के दिन जिला प्रशासन स्थानीय अवकाश घोषित करती है। नारायणपुर का मावली मेला क्षेत्र का सबसे बड़ा लोक उत्सव है, यह जिले का एक सामूहिक आयोजन है, जिसमें सामाजिक संस्था,प्रशासन, पुलिस विभाग जनप्रतिनिधि देव समिति सभी अपनी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

नारायणपुर मावली मेला का इंतजार साल भर से होता है आदिवासी अपना फसल वनोपज एकत्रित कर मेले में बेचकर अपनी जरुरतों के सामान खरीदारी कर सके और जरुरत की पूर्ति कर सके वे लोग साल भर अपना पैसा एकत्र करके रखते हैं ताकि मेले में अपने जरूरत का सामान कपड़ा, सोना, चांदी आभूषण श्रृंगार के सामान इत्यादि क्रय एवं मनोरंजन कर सकें। इसी कड़ी में नारायणपुर जिला प्रशासन द्वारा इस वर्ष मावली मेला का आयोजन 15 फरवरी को आयोजित की गई है।

15 फरवरी से रात्रि आदिवासी मांदर नृत्य के साथ विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम 19 फरवरी तक मावली मेला स्थल में प्रस्तुति दी जाएगी। जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा सभी तैयारियों के साथ जिला प्रशासन के सभी विभागों की प्रदर्शनी स्टाल मेला में लगा कर संचालन किया गया है। मावली मेला का उद्घाटन विधायक चंदन कश्यप 15 फरवरी को करेंगे। मेला का समापन 19 फरवरी को आबकारी मंत्री कवासी लखमा के द्वारा किया जाएगा।

Maad Sandesh
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