कोंडागाँवछत्तीसगढ़

दूसरों के खेतों में करती थी मजदूरी उषा, अब स्वयं कर रही सब्जी उत्पादन

सफलता की कहानी

कोंडागाँव प्रोनित दत्ता

बिहान की लखपति दीदी पहल से उषा को मिली जीवन की नई राह

कोण्डागांव दैनिक(अमर स्तम्भ) ग्राम बादालूर की उषा के कंधों पर पूरे घर की जिम्मेदारी थी। वह इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए दूसरों के खेतों में काम करती थी। अब उषा की जिन्दगी में बदलाव आया है और अब खुद सब्जियों का उत्पादन कर रही है। उषा अब सब्जी से प्रति सप्ताह 1000 रूपये से अधिक की लौकी बाजार में विक्रय कर रही है और आने वाले समय में लौकी की खेती से उन्हे 12 से 15 हजार आमदनी प्राप्त होगी। उषा सब्जी उत्पादन के साथ-साथ मौसम के दौरान लघु वनोपज जैसे महुआ, साल, ईमली, टौरा का भी संग्रहण कर विक्रय भी करती हैं। जिससे उन्हे अतिरिक्त 10 से 12 हजार रूपये की आय प्राप्त हो जाती है। उषा कोर्राम आज सब्जी की खेती करके गांव के अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हैं।
उषा की जिन्दगी में यह बदलाव बिहान कार्यक्रम से जुड़ने के बाद आया। बिहान के बीपीएम रैनु नेताम ने बताया कि महिलाओं को प्रेरित कर स्व-सहायता समूह बनाकर कार्य करने हेतु बिहान के माध्यम से प्रेरित किया गया। जिस पर 10 महिलाओं ने मिलकर गौरी स्व-सहायता समूह बनाया और उषा भी इसकी सदस्य बनीं।
उषा एक निर्धन परिवार से आती थीं और घर का सारा काम-काज उषा ही सम्भाला करती थी। जिसके लिए उषा को दुसरे के यहाँ मजदूरी करतीं और पुश्तैनी खेत में पारंम्परिक तरीके से केवल धान की खेती करती ताकि घर चला सकें। ऐसे में समूह से जुड़कर अधिकारियों द्वारा जय मां कर्मा कलस्टर संगठन मर्दापाल अंतर्गत ‘लखपती दीदी‘ पहल के तहत 05 गांव को इन्टीग्रेटेड फार्मिंग कलस्टर के रूप में चयन की जानकारी दी गयी। जिसमें 05 गांव से 250 किसानों को तीन गतिविधि मक्का उत्पादन, सब्जी उत्पादन, वनोपज संग्रहण एवं बैकयार्ड मुर्गीपालन कार्य से जोड़ा जाना था। चयनित गाँवो में से ग्राम बादालूर का चयन किया गया। गौरी स्व-सहायता समूह की उषा कोर्राम ने सब्जी उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया। उषा ने समूह के साथ मिलकर पांच डिसमिल में लौकी की खेती प्रारंभ की। अब वे एक सफल गृहणी के साथ सफल व्यवसायी भी बन गयी है।
उषा कोर्राम दीदी के समूह से जुड़ने एवं उनके सफल होता देख आज ग्राम की अन्य महिलायें भी प्रेरित हो रही हैं और साथ ही बिहान अंतर्गत ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका को बेहतर बनाने के लिए खुद से ही रोजगार मूलक गतिविधियों से जुड़ रही हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग छत्तीसगढ़ के द्वारा कोण्डागांव जिले के महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सशक्तिकरण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत महिलाओं एवं युवतियों को स्व-सहायता समूह के माध्यम से आजीविका के नए माध्यम से जोड़ना है ताकि जिले की महिलाएं आत्मनिर्भर होकर आगे बढ़ सकें। इसके लिए बिहान द्वारा लखपति दीदी पहल चलाकर समूह के साथ जुड़ी महिलाओं के उत्थान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

Maad Sandesh
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