
नारायणपुर में स्वास्थ्य सेवाएं संकट में: डॉक्टरों की भारी कमी और 6 महीने से नहीं मिला प्रोत्साहन भत्ता
माड़ संदेश खबर
नारायणपुर, छत्तीसगढ़ — नक्सल प्रभावित नारायणपुर ज़िले में स्वास्थ्य सेवाएं गहरे संकट से गुजर रही हैं। ज़िला अस्पताल से लेकर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक डॉक्टरों की भारी कमी है। इसके साथ ही, छह महीने से नक्सल प्रभावित क्षेत्र प्रोत्साहन भत्ता (सीआरएमसी) नहीं मिलने के कारण स्वास्थ्यकर्मियों में व्यापक असंतोष और निराशा व्याप्त है।
डॉक्टरों की अनुपस्थिति से चरमराई चिकित्सा व्यवस्था
ज़िला अस्पताल नारायणपुर सहित अधिकांश स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टर विहीन हो चुके हैं। जो डॉक्टर पूर्व में तैनात थे, वे अब “लीव विदाउट पे” पर चले गए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज लगभग ठप हो गया है। गर्भवती महिलाएं, नवजात शिशु और आपातकालीन रोगी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के इस्तीफे से और गहरा हुआ संकट
मूल वेतन संबंधी समस्याओं के कारण हाल ही में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद वांकर और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एल.एन. वर्मा ने नारायणपुर ज़िला अस्पताल से इस्तीफ़ा दे दिया है। अब अस्पताल में सीज़ेरियन जैसे महत्वपूर्ण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं, जिससे गंभीर रोगियों को आसपास के ज़िलों में रेफर करना पड़ रहा है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ के जाने से मोतियाबिन्द के ऑपरेशन के लिए मरीजों को जिला चिकित्सालय कोंणडागाँव भेजा जा रहा है। वहीं उपकरणों की खराबी के कारण मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है ।
एमबीबीएस बांड पोस्टिंग में भी नहीं मिला एक भी डॉक्टर
10 जून 2025 को जारी स्वास्थ्य संचालनालय की एमबीबीएस ग्रामीण बांड पोस्टिंग सूची में नारायणपुर जिले को एक भी डॉक्टर आवंटित नहीं किया गया है। यह निर्णय हैरान करने वाला और जिले की स्वास्थ्य प्रणाली के प्रति लापरवाही का प्रतीक है।
सीआरएमसी न मिलने से टूटा मनोबल
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मी जीवन जोखिम में डालकर सेवा देते हैं। ऐसे में छह महीने से सीआरएमसी (प्रोत्साहन भत्ता) नहीं मिलना न केवल अन्याय है, बल्कि कर्मचारियों के मनोबल को भी तोड़ रहा है। कई कर्मचारी अब स्थानांतरण या लम्बे अवकाश की ओर बढ़ रहे हैं।
एक तरफ पुलिस की सफलता, दूसरी तरफ स्वास्थ्य सेवाओं की उपेक्षाजहाँ एक ओर पुलिस विभाग नक्सल उन्मूलन में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता आम जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित कर रही है। शासन को चाहिए कि तुरंत संज्ञान लेते हुए आवश्यक डॉक्टरों की नियुक्ति करे और लंबित सीआरएमसी का वितरण शीघ्र सुनिश्चित करे।




