

परिवहन भाड़ा ₹707 से बढ़ाकर ₹910 प्रति टन करने, 100% स्थानीय भर्ती और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की उठाई मांग
जगदलपुर/नारायणपुर। रावघाट परियोजना क्षेत्र में ग्रामीणों, किसानों, वाहन स्वामियों और श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति ने बस्तर संभाग के कमिश्नर सहित नारायणपुर एवं उत्तर बस्तर कांकेर के कलेक्टरों को संयुक्त ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। समिति ने परिवहन भाड़े में वृद्धि, स्थानीय युवाओं को रोजगार, जर्जर सड़कों की मरम्मत, वाहन चालकों की कार्य परिस्थितियों में सुधार और खदानों से निकलने वाले दूषित लालपानी से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं।
समिति के अनुसार, रावघाट परियोजना क्षेत्र में खनन गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
परिवहन भाड़ा बढ़ाने और सड़कों की मरम्मत की मांग
समिति ने वर्तमान में लौह अयस्क परिवहन के लिए निर्धारित ₹707 प्रति टन भाड़े को बढ़ाकर ₹910 प्रति टन करने की मांग की है। समिति का कहना है कि ईंधन की कीमतों, बढ़ती महंगाई और नारायणपुर-अंतागढ़ मार्ग की जर्जर स्थिति के कारण वाहन मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। खराब सड़कों के चलते टिप्परों के गियर बॉक्स और अन्य महंगे पुर्जे बार-बार खराब हो रहे हैं, जिससे वाहन मालिकों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।
खदानों में 100 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग
समिति ने आरोप लगाया कि खनन परियोजना से प्रभावित स्थानीय ग्रामीणों की कृषि भूमि और आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, इसके बावजूद स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा है। ज्ञापन में गैर-तकनीकी और अर्ध-तकनीकी पदों पर 100 प्रतिशत स्थानीय युवाओं की भर्ती सुनिश्चित करने तथा भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की गई है।
वाहन चालकों की कार्य परिस्थितियों पर जताई चिंता
समिति ने नो-एंट्री व्यवस्था और लगातार वाहन चलाने की मजबूरी को लेकर भी चिंता जताई है। ज्ञापन के अनुसार, दिन में नो-एंट्री के कारण चालकों को रात में वाहन चलाना पड़ता है। सुबह लौटने के बाद लोडिंग पॉइंट पर लंबे समय तक इंतजार करने से उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। समिति ने कहा कि लगातार काम करने की ऐसी परिस्थितियां चालकों के स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं। इस समस्या के समाधान के लिए उचित कार्य समय और विश्राम की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों पर प्रताड़ना का आरोप
समिति ने आर्थिक मंदी और वाहन ऋण की किश्तें चुकाने में आ रही कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कुछ फाइनेंस कंपनियों के एजेंट वाहन मालिकों और उनके परिवारों पर दबाव बनाते हैं तथा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। समिति ने प्रशासन से मामले की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई करने और प्रभावित परिवारों को राहत दिलाने की मांग की है।
लालपानी से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग
खदानों से निकलने वाले दूषित लालपानी के कारण खेतों और फसलों को नुकसान पहुंचने का मुद्दा भी ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया है। समिति का कहना है कि इससे किसानों की खड़ी फसलें प्रभावित हो रही हैं और कृषि भूमि की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। प्रभावित क्षेत्रों का संयुक्त सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने तथा पात्र किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की गई है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान आकर्षित किया
समिति ने प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति सुधारने की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान स्कूल अंतागढ़ में होने के कारण बच्चों को प्रतिदिन लगभग 100 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। ज्ञापन में स्कूल को नारायणपुर या भैंसगांव के समीप स्थानांतरित करने की मांग की गई है।
इसके अलावा, प्रभावित गांवों के स्कूलों में डीएमएफटी और सीएसआर मद से आरओ वाटर, इनवर्टर, बेंच-टेबल जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने, नर्सिंग एवं अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए विद्यार्थियों को सहायता देने और अतिथि शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि करने की मांग की गई है। समिति ने प्राथमिक स्तर के अतिथि शिक्षकों के लिए ₹20,000 तथा मिडिल स्कूल के अतिथि शिक्षकों के लिए ₹25,000 मासिक मानदेय निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा है।
ज्ञापन में बंद पड़ी सोलर लाइटों को चालू कराने तथा उप स्वास्थ्य केंद्रों का जीर्णोद्धार कर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग भी शामिल है।
विकास के साथ स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा पर जोर
बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी मांगें विकास कार्यों के विरोध में नहीं, बल्कि परियोजना से प्रभावित स्थानीय नागरिकों, किसानों, युवाओं, वाहन मालिकों और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए हैं। समिति ने जोर दिया कि खनन परियोजना से प्रभावित लोगों को रोजगार, उचित मुआवजा और बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि बस्तर संभाग के कमिश्नर तथा नारायणपुर और उत्तर बस्तर कांकेर के कलेक्टर संबंधित विभागों के माध्यम से समस्याओं का परीक्षण कराकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे, ताकि रावघाट परियोजना क्षेत्र के लोगों को जल्द राहत मिल सके।
स्रोत एवं पक्ष: बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति, जिला नारायणपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी एवं ज्ञापन में उल्लिखित मांगों के आधार पर।




