
जिला नारायणपुर

खबर: नक्सली कमांडर नम्बाला केशव राव उर्फ बसवराजू की पहचान होते ही उसके परिजनों को मीडिया के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई। रविवार को उसका छोटा भाई रामप्रसाद (ग्राम त्रिकाकुलम, जिला श्रीकाकुलम, मंडलम श्रीकाकुलम, आंध्रप्रदेश), चचेरा भाई कोडंता, भतीजा जनार्दन, सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया और चार अन्य नक्सली परिजन पूरी तैयारी के साथ तेलंगाना से 3 एयरकंडीशनर मरचुरी एम्बुलेंस एवं दो गाड़ी में नारायणपुर जिला अस्पताल शव लेने पहुंचे हैं शव अब तक नही दिया गया परिजनों को।
हालांकि अभी तक पुलिस वेरिफिकेशन और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाई हैं, जिसके चलते शव परिजनों को नहीं सौंपा गया है। माड़ संदेश की टीम से बातचीत में परिजनों ने बताया कि बसवराजू बीटेक और एमटेक की पढ़ाई के दौरान नक्सली गतिविधियों में शामिल हुआ था। एक बार जेल भी गया, लेकिन वहां से फरार होकर छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़, ओडिशा और महाराष्ट्र में सक्रिय हो गया। वह बीते 50 वर्षों से परिवार से अलग था और घर परिवार से दूरी बना लिया था । बताया गया कि परिजन आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के साथ शव लेने पहुंचे हैं, लेकिन प्रशासनिक अनुमति के बिना शव नहीं सौंपा जा सकता।
बसवराजू वही खूंखार नक्सली था, जिसने 12 वर्ष पूर्व झीरम घाटी में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर हमला किया था, जिसमें 27 लोगों की जान गई थी, जिनमें कई वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। इसके अलावा दंतेवाड़ा में 76 जवानों और बीजापुर में 55 जवानों की शहादत के पीछे भी उसका ही हाथ था।
सुरक्षा बलों के लिए उसकी मौत एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। फिलहाल शव जिला अस्पताल में कड़ी पुलिस निगरानी में रखा गया है और सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही उसे सौंपा जाएगा।




