

जिला नारायणपुर
विश्व प्रसिद्ध माता मावली मेला में इन दिनों हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। माता के दरबार में आस्था का सैलाब है, लेकिन शहर की बदहाल सड़कें श्रद्धालुओं का स्वागत करने के बजाय प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रही हैं। मुख्य मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री के नारायणपुर दौरे के दौरान उनके निर्धारित मार्ग की सड़कें रातों-रात दुरुस्त कर दी गई थीं। लेकिन अब जब मावली मेले में आम जनता और हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, तो उन्हीं सड़कों की मरम्मत को लेकर प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। सवाल उठ रहा है कि क्या व्यवस्था केवल वीआईपी दौरों तक ही सीमित है?
नागरिकों ने चिंता जताई है कि यदि इन गड्ढों के कारण कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? मेले जैसे बड़े आयोजन में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी को लोग गंभीर लापरवाही मान रहे हैं।
इसी बीच प्रशासन की निष्क्रियता के विरोध में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने आगे आकर श्रमदान के माध्यम से सड़कों के गड्ढों को भरने का कार्य किया। युवाओं का कहना है कि जब जिम्मेदार विभाग अपनी भूमिका नहीं निभा रहे हैं, तब समाज के युवाओं को आगे आकर जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है।
नगर पार्षद विजय सलाम ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री के लिए सड़कें रातों-रात बन सकती हैं, तो मावली मेला में आने वाले श्रद्धालुओं और आम जनता के लिए भी समान व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल दिखावे और कागजी खानापूर्ति से व्यवस्था नहीं चलती, जमीनी स्तर पर कार्य होना आवश्यक है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी तत्काल स्थायी समाधान सुनिश्चित करें और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय की जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है क्या विकास केवल दौरों तक सीमित रहेगा या आम जनता को भी इसका लाभ मिलेगा?




